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सरकारी मशीनरी की लापरवाही ने बरेली में मनरेगा को दिया झटका

सरकारी मशीनरी की लापरवाही ने बरेली में मनरेगा को जोरका का झटका दिया है. चालू वित्तीय वर्ष में बरेली के 425 गांवों में अभी तक मनरेगा के तहत काम ही शुरू नहीं हो सकें हैं. एक भी मानव दिवस इन गांवों में आयोजित नहीं हुआ है.

बहेड़ी और फतेहगंज पश्चिमी समेत कई ब्लाॠक में कई हाल बहुत खराब है. शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम को जरूरी कदम उठाने के आदेश दिए हैं. आनन-फानन में सीडीओ ने शनिवार को 425 गांवों के रोजगार सेवकों की विकास भवन में मीटिंग बुलाई है.

बरेली में 3.40 लाख जाॠब कार्डधारी मनरेगा मजदूर हैं. मनरेगा मजदूरों के जरिए सभी ग्राम पंचायतों में तालाबों की खुदाई की जानी थी. चकरोड और सड़कों का निर्माण किया जाना था. बावजूद इसके ब्लाॠक स्तर पर सरकारी मशीनरी ने अफसरों के आदेश को हवा में उड़ा दिया. लडखड़ाती मनरेगा को रफ्तार नहीं मिल सकी.

बार-बार मीटिंग करने के बाद भी 425 गांवों में ब्लाॠक के अधिकारियों ने मनरेगा मजदूरों को साइट मुहैया नहीं कराई गई. शासन ने 1193 में से 425 गांवों में मनरेगा से विकास कार्य ने होने पर ऐतराज जताया है. शासन ने सभी गांवों में मनरेगा से तालाबों की खुदाई समेत गाइडलाइंस के मुताबिक बाकी काम शुरू कराने की नसीहत दी है.

मालूम हो कि चालू वित्तीय वर्ष में शासन ने 20 लाख से अधिक मानव दिवस आयोजित कराने का टारगेट दिया है. सीडीओ ने शनिवार को 425 गांवों के रोजगार सेवकों को मीटिंग के लिए बुलाया है. तीन शिफ्ट में रोजगार सेवकों के साथ सीडीओ और डीसी मनरेगा मीटिंग करेंगे.

425 गांवों में मनरेगा की प्रगति शून्य है. इन गांवों में मनरेगा के तहत काम शुरू कराने की रणनीति बनाई जा रही है. रोजगार सेवकों के साथ शनिवार को मीटिंग होगी. बीडीओ से बात हो रही है.

– गंगाराम, डीसी मनरेगा

 

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Izzatnagar Railway Station, Bareilly