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बरेली: सुन्नी बनाम शिया हुआ अजमेर न जाने के एलान का विवाद

दरगाह अजमेर शरीफ के एक खादिम की मसलके आला हजरत पर टिप्पणी. पलटवार में आला हजरत के सौ साला उर्स-ए-रजवी से अजमेर स्थित दरगाह ख्वाजा गरीब पर न जाने का एलान… उलमा के बीच छिड़ा यह मामला अब सुन्नी बनाम शिया में बदल रहा है. उर्स में बरेली आए नागपुर निवासी ऑल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य इंजीनियर मुहम्मद हामिद ने कहा कि मसलके आला हजरत पर टिप्पणी करने वाले कामरान चिश्ती शिया हैं.

अगर कामरान पर कार्रवाई नहीं हुई तो मान लिया जाएगा कि उन्हें शिया विचारधारा का समर्थन मिला है. समाज उनके पीछे खड़ा है. इस सूरत में सुन्नी समाज शियाओं के बायकाट की मुहिम शुरू करेगा. हालांकि, मंगलवार को फोन पर हुई बातचीत में मोहम्मद हामिद ने उम्मीद जताई कि शिया समाज के बुजुर्गो ने टिप्पणी का संज्ञान लिया है. कामरान चिश्ती के खिलाफ जल्द कार्रवाई सामने आएगी.

उर्स-ए-रजवी से दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज न जाने के एलान पर मुहम्मद हामिद कहते हैं कि ख्वाजा की दरगाह का बायकाट नहीं करना चाहिए, बल्कि जो लोग वहां बैठे हैं, उनका बायकाट हो. ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के किसी जिम्मेदार ने कभी मसलके आला हजरत पर कोई गलतबयानी नहीं की है.

मुहम्मद हामिद ईमान तंजीम के अध्यक्ष भी हैं. लखनऊ से उठेगी आवाज मुहम्मद हामिद कहते हैं कि लखनऊ में शिया विचारधारा के प्रमुख लोगों के संज्ञान में यह मामला पहुंच चुका है. उम्मीद है कि वे जल्द इस पर कार्रवाई का फैसला लेंगे.

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