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बरेली: अफसर दिलदार! खुद ही अपना ख्याल रखें खरीदार

किसी बड़ी अनहोनी घटना को नजरअंदाज करके अफसर न केवल बैकफुट पर आ गए हैं, बल्कि सुभाषनगर में रेलवे लाइन किनारे पटाखा बाजार न लगने देने का अपना फैसला भी पलट दिया है. सोमवार को पटाखा बाजार लगाने की अनुमति दे दी है. जबकि जिला प्रशासन ने यहां अमृतसर हादसे से सबक लेते हुए पटाखा बाजार न लगने देने का फैसला लिया था.

चर्चा है कि एक बड़े जनप्रतिनिधि के दबाव में अधिकारियों ने अपने निर्णय से यू-टर्न ले लिया और आंखें मूंदकर दुकानदारों को सोमवार की शाम को परमिट भी जारी की. इसके अलावा दूसरे पटाखा बाजारों में भी दुकानें सज गई हैं. सुभाषनगर में जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-छह के पीछे दिवाली पर पटाखे का काफी बड़ा बाजार लगता है. इसमें ग्राहकों की काफी भीड़ भी जुटती है.

लेकिन इस बार दशहरा मेला के दौरान अमृतसर के पास रेललाइन पर खड़ी भीड़ पर ट्रेन से गुजर जाने की बड़ी घटना से सबक लेते हुए जिला प्रशासन ने पहले यह फैसला लिया था कि सुभाषनगर में पटाखा बाजार रेल ट्रैक के काफी पास है, इसलिए वहां बाजार लगाने पर प्रतिबंध लगेगा. इसके बावजूद रविवार को रेल लाइन के पास पटाखा बाजार सजने लगा.

अंदरखाने दुकानदारों का लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई. चर्चा है कि एक कद्दावर नेता के दबाव में दुकानदारों को परमीशन देने के लिए फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन की तरफ से परमिट देने के लिए रिपोर्ट लगा दी गई. अफसरों ने पहले यह यू-टर्न लिया कि सुभाषनगर में रेलवे स्कूल के पास पटाखा बाजार लगेगा, रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक दुकानें नहीं लगने दी जाएगी. दुकानों की संख्या भी केवल 15 ही रहेगी.

जबकि बाद में अनहोनी की आशंका की अनदेखी करते हुए अफसर अपने फैसले को लेकर पूरी तरह से बैकफुट पर आ गए और सोमवार की शाम को कलक्ट्रेट में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के स्टाफ ने आवेदन करने वाले सभी दुकानदारों को परमिट जारी कर दिए हैं. बताते हैं कि पूर्व निर्धारित 15 दुकानों के बजाय 40 से ज्यादा दुकानदारों को लाइसेंस दिए गए हैं.

रेलवे ट्रैक से होकर गुजरती है सैकड़ों की भीड़

सुभाषनगर में लगने वाले पटाखा बाजार से खरीददारी करने जंक्शन के पास रेलवे लाइन से सैकड़ों की तादाद में भीड़ गुजरती है. इसमें बड़ी तादाद में महिला और बच्चे भी शामिल होते हैं. इस ट्रैक से होकर दिल्ली, लखनऊ सहित कई अन्य रूट के लिए दर्जनों ट्रेनें भी गुजरने से हादसे की आशंका बनी रहती है. अनहोनी की आशंका यह भी है कि अगर पटाखा बाजार में कोई हादसा होता है तो भीड़ ट्रैक की ओर की दौड़ेगी. इस दौरान भी बड़ी दुर्घटना घटित होने से इंकार नहीं किया जा सकता.

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