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अब बरेली से होगी आई – टू अभियान की शुरुआत

मी-टू मूवमेंट के शोर के बीच बरेली से आई-टू मूवमेंट शुरू हुआ है. आई-टू मूवमेंट के तहत पुरुष-महिला के रिश्ते को मजबूती देने की कोशिश की जा रही है. लोग महिलाओं का सहयोग करते हुए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. जीआईसी में उप प्रधानाचार्य डॉ. अवनीश यादव ने इसकी शुरुआत की है.

देश-विदेश में इस समय मी-टू मूवमेंट की चर्चा है. जाने माने लोग इस मूवमेंट का शिकार हो रहे हैं. बीसीसीआई के सीईओ बरेली निवासी राहुल जौहरी पर भी शोषण का आरोप लग चुका है.

जबकि बरेली की गायिका वर्षा सिंह ने गायक कैलाश खैर और संगीतकार तोशी को कटघरे में खड़ा कर डाला.

मी-टू के शोर के बीच जीआईसी में उप प्रधानाचार्य डॉ. अवनीश यादव ने आई-टू अभियान शुरू किया है. डॉ. अवनीश ने सोशल मीडिया पर किचन वर्क में पत्नी का सहयोग करते हुए तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. उन्होंने दूसरे लोगों से भी अपनी पत्नी, मां, बहन, कलीग आदि का सहयोग करने की अपील की है.

डॉ. अवनीश कहते हैं कि मी-टू अभियान का वो पूरा समर्थन करते हैं. जिसने भी गलत काम किया हो उसको सजा मिलनी चाहिए.

मगर आई-टू अभियान का अपना एक अलग मकसद है. यह घर के दैनिक कामकाज में पितृसत्तात्मक रवैये के खिलाफ एक पहल है. घर के काम काज जैसे झाडू पोंछा, जूठे बर्तन साफ करना, वाशरूम साफ करना जैसे तमाम काम नारी के ही जिम्मे कर दिए जाते हैं.आखिर ऐसा क्यों?

मेरी लोगों से अपील है कि वो इस तरह के कामों में महिलाओं का सहयोग करें. और गर्व के साथ उसके फोटो एफबी पर पोस्ट करें. हमको अपने आफिस में भी महिलाओं के साथ इसी तरह से सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए.

डॉ. अवनीश कहते हैं कि यदि पुरुष के कारण किसी भी महिला को कोई दिक्कत हुई हो तो उसके लिए उसे खुद माफी मांगनी चाहिए.

आई-टू अभियान के तहत लोग कन्फेशन भी कर सकते हैं. यदि कन्फेशन की हिम्मत नहीं है तो उक्त महिला से व्यक्तिगत तौर पर सम्पर्क कर माफी मांग सकते हैं.

यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है तो हमारी जिम्मेदारी है कि उसको टोकें, बार बार टोकने पर बदलाव जरूर नजर आएगा. बदलाव न आये तो ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करें.

यह है आई-टू अभियान

– पितृसत्तात्मक रवैये पर चोट करना

– महिलाओं के साथ आत्मीय और सम्मानजनक व्यवहार

– महिलाओं का घर-दफ्तर में सहयोग करना

– पति-पत्नी के बीच सम्बधों को मजबूती देना

– मां-बेटियों की सुरक्षा को प्रयास करना

– महिलाओं का सम्मान नहीं करने वालों का सामाजिक बहिष्कार

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